Monday, September 7, 2009

HINDI

मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने फिर वही राग अलापा है कि यदि हरियाणा में अल्ग से गुरू?द्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन होता है तो पंजाब के हालात फिर से खराब हो जाएंगे।मुख्यमंत्री को ऐसे ब्यानों से गुरेज करना चाहिए-यदि वो सच में राज्य के हालात खराब नहीं होने देना चाहते।दिल्ली के सिख वहां अल्ग गुरू?द्वारा प्रबंधक कमेटी चाहते हैं, और हरियाणा सरकार उनकी मांग को पूरा करने के प्रयास कर रही है।दूसरी ओर अकाली दल बादल बनाम बादल परिवार इसका भर्सक विरोध कर रहा है।मुख्य मंत्री की बहू हरसिमरत कौर बादल के नेतृत्व में अकाली दल के सांसद संसद में भी शोरगुल कर चुके हैं।
वास्तव में अकाली दल इस पूरे मुद्दे को जिस तरह ले रहा है और उससे निबट रहा है वह तरीका कतई सही रहीं है।सच पूछो हो इस विरोध में दलील नहीं, तिलमिलाहट है और यह तिलमिलाहट स- प्रकाश सिंह बादल, अन्य अकाली नेताओं व एसजीपीसी अध्य?क्ष के ब्यानों से साफ झलकती है।
यह नेता हरियाणा में अलग गुरू?द्वारा कमेटी के गठन के सूरत में पंजाब के हालात फिर से खराब होने की बात करते हैं, कभी इसे सिक्खों को बांटने की संज्ञा देते हैं तो कभी इस मामले में रायशुमारी की तजवीज को देश के लिए घातक बताते हैं। वास्तव में ऐसा कुछ नहीं है।साधारन सिक्खों में ऐसी कोई हलचल या विरोध दिखाई नहीं पड़ता। सिर्फ अकाली दल बादल को छोड़कर अन्य गुट इस कमेटी का सामर्थन कर रहे हैं।
कोई भी समझ सकता है कि यदि हरियाणा के सिख अपने ?क्षेत्र के गुरू?द्वारों के प्रबंधक के लिए अलग से कमेटी बनाना चाहते हैं तो इसमें गलत क्या है?? खास करके तब जब दिल्ली में पहले ही अलग गुरू?द्वारा प्रबंधक कमेटी कायम है। अकाली दल इस मामले में हरियाणा में मुख्यमंत्री भूपिद्र सिंह हुडडा व कांग्रेस पर सिक्खों को बांटने व उनके धारमिक ममालों में दखल देने के अरोप लगा है। लेकिन यदि हरियाण में कांग्रेस की सरकार न होती तो अकाली दल क्या कहता?? यदि अकाली दल के आरोपों को सही मानकर उनसे सहमत हो जाऐं तो फिर अकाली दल बादल को भी कोई अधिकार नहीं रह जाता कि इस मामले में दखल दे। यह सिक्खों का धार्मिक मामला है और शियद एक राजनीतिक दल। हमें यह नहीं भूूलना चाहिए कि सियासत में कांग्रेस व अन्य किसी भी राजनीतिक दलों में कार्यरत सिक्ख भी सिक्ख है। उनका भी गुरूओं व गुरू?द्वारों पर उतना ही हक है जितना किसी अकाली दल के किसी कार्यकरता का। किसी भी व्यक्ति की सिक्खी के प्रति श्रद्धा को उसकी राजनीतिक पार्टी को पैमाना बनाकार नहीं मापा जा सकता।लेकिन हम सब जानते हैं यहां ऐसा ही होता आ रहा है। मुख्मंत्री प्रकाश सिंह के लिए तो अकाली दल बादल के ?1 बाहर के सभी लोग न केवल सिख विरोधी बल्कि देशद्रोही हैं।वीरवार को लौंगोवाल में शियद लौंगोवाल को पूर्नसुरजीत किए जाने पर प्रति?श्क8या में उन्होनें ऐसे ही विचारों का इजहार किया है। अखबारों में छपे उनके शब्द हैं, ‘‘कांग्रेस पार्टी ने हमेशा ही देशद्रोही ताकतो को कठपुतली बना पंजाब के विरोध के लिए इस्तेमाल किया है। इस समागम में जो नए अकाली दल जो नए अकाली दल गठित हो रहे हैं वह भी उसी साजिश का हिस्सा हैं।’’ इन शब्दों से सब कुछ आसानी से समझा जा सकता है।
इस समूचे मामले में ध्यान देने और समझने की बात यह है कि आखिर हरियाणा के सिक्खों का शिरोमणी गुरू?द्वारा प्रबंधक कमेटी अमृतसर से मोहभंग क्यों हो गया?? हम जब जानते हेैं कि अकाली दल बादल व बादल परिवार पर यह आरोप अक्सर लगते रहे हैं कि वह एसजीपीसी को अपने सियासी मकासद के लिए इस्तेमाल करते हैं। यह आरोप निराधार भी नहीं हैं। जिस तरीके से एसजीपीसी के अध्य?क्ष, तख्तों के जत्थेदारों की नियुक्ती एवं बर्तरफी होती है हम जब जानते है।अक्सर देखा गया है कि जिन लोगों को विधानसभा चुनाव का टिक्ट या कोई चेयरमेनी नहीं मिल पाती उन्हें एसजीपीसी का टिक्ट दे दिया जाता है। हरियाणा के सिक्खों का शिकवा है कि एसजीपीसी हरियाणा के गुरू?द्वारों की माया तो एसजीपीसी एकत्र करती है लेकिन वहां के गुरूद्वारों की ठीक से देखभाल व विस्तार पर उचित ध्यान नहीं दिया जाता।
ऐसे में यदि हरियाणा के सिख एसजीपीसी की कार्यप्रणाली से नाखुश हैं और अपनी राज्य के लिए अलग गुरू?द्वारा प्रबंधक कमेटी का गठन चाहते हेैं तो उसमें कुछ भी गलत नहीं है। यह उनका अधिकार है। ऐसा करके हरियाणा के सिख सिखी के केंद्रीय मूल भाव से टूट नहीं जाएंगे। इस मामले में पंजाब के हालात फिर से खराब होने की आशंका वाले ब्यान वास्तव में सिखों की धार्मिक भावनाओं को उतेजित कर राजनीतिक लाभ लेने की कवायद हैं।यदि किसी को यह लगता है कि हरियाणा में अलग गुरू?द्वारा प्रबंधक कमेटी का मुद्दा कांग्रेस या कोई अन्य जानबूझ कर उछाल रहा है और हरियाणा के सिख अलग गुरू?द्वारा प्रबंधक कमेटी नहीं चाहते तो फिर सिखों की राय जानने के लिए एक जी रासता है-रायशुमारी।लेकिन ऐसे ब्यानों के गुरेज किया जाना चाहिए जिनकी वजह से राज्य ेमें फिर से आशांती का दौर लौट सकता हो।कम से कम स- प्रकाश सिंह बादल जैसे बजुरग नेता तो जो चौथी बार राज्य में मुख्यमंत्री के पद पर आसीन हैं।

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